Instagram aur facebook ka dark side.

29

Jun
By Virat anand
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Instagram aur facebook ka dark side.

 

Instagram के एल्गोरिदम में काफ़ी सालों से User Testing चल रही है, जिसमें Researchers A/B Testing करते हैं, यानी यह देखते हैं कि दो डिज़ाइनों में से कौन-सा डिज़ाइन बेहतर है और लोगों के लिए इस्तेमाल करना अधिक आसान है। कौन-सा वीडियो कब दिखाया जाए, किसको दिखाया जाए, और उसकी Target Audience कौन है।

Facebook, Meta और Instagram जैसी कंपनियाँ Research पर काफ़ी पैसा निवेश करती हैं।

कंपनी के Employees को बताया जाता है कि यह Testing App को बेहतर बनाने, User Engagement बढ़ाने, Ads का Revenue बढ़ाने और Users हमारे App या Website पर ज़्यादा से ज़्यादा समय कैसे बिताएँ, यह समझने के लिए की जा रही है।

फिर उनके Digital Labs और User Testing Websites पर Real Users के साथ इन Designs और Features की Case Studies और Tests किए जाते हैं। इन Research Findings को बाद में कंपनी के अलग-अलग Departments के साथ Share किया जाता है।

पर इन Tests के Parameters, जो Employees को बताए जाते हैं, उससे काफ़ी अलग भी हो सकते हैं। इस Data का उपयोग कंपनी काफ़ी intelligently Study करके यह समझने के लिए करती है कि App या Website को और अधिक Addictive कैसे बनाया जाए, और फिर उसे Implement किया जाता है।

कंपनी के पास काफ़ी Tools, AI और Resources होने के कारण वह Violent Content, Abusive Content, Road Rage, Child Abuse, Rape Videos, Porn, Softcore Porn, Gender Wars, Gen Z Mental Health Issues, Triggers, Drugs और Dark Web जैसे Dangerous Content को App की Feed में काफ़ी intelligently Place कर सकती है।

आपकी Age, आपकी Income Group, आपके Religious Beliefs, आपकी पसंद-नापसंद और आपकी Online Activity के आधार पर दो Funny Reels के बीच अचानक एक Anti-Religious Video, Sexually Arousing Content, Domestic Abuse, Animal Cruelty, Feminism का Negative Narrative या कोई अत्यधिक Engaging Reel डाल दी जाती है। धीरे-धीरे Scroll करते-करते आप इस तरह के Content के आदी होने लगते हैं।

फिर यही Matrix बहुत चतुराई से आपकी Programming करता है। अगर आप Frustrated हैं, तो आपको नई गाड़ी खरीदने की इच्छा पैदा की जाती है। अगर किसी Religion के प्रति नफ़रत वाला Content आपको Engage करता है, तो वैसा और Content दिखाया जाता है। अगर India, Civic Sense, Gender, Politics या किसी Community के प्रति गुस्सा आपको ज़्यादा देर तक Screen पर रोकता है, तो वही Narrative बार-बार आपकी Feed में आने लगता है। धीरे-धीरे झगड़े, Road Rage, मारपीट, Extreme Behaviour और कभी-कभी Self Harm जैसी मानसिक अवस्थाओं को भी लगातार Trigger करने वाला Content आपके सामने आता रहता है।

दो Users के साथ एक ही Video Test करके वह यह जान सकती है कि उसका Emotional Response कैसा रहा। फिर उसी Video को अलग-अलग लोगों के साथ Test करके यह समझा जाता है कि Target Audience को क्या पसंद है, क्या नहीं, कब वह गुस्सा होते हैं, कब Depress होते हैं, कब उनका Frustration बढ़ता है और कब उनका मनोरंजन होता है। इसका काफ़ी Detailed Analysis, Reports और Validated Authentic Data तैयार किया जाता है।

फिर Social Media पर धर्म के नाम पर Negative Content, Gender Wars, False News, False Agendas, Riots और Political Hatred को फैलाया जाता है।

जो Employees इन Platforms पर काम करते हैं, उन्हें भी अक्सर इसकी पूरी तस्वीर नहीं पता होती, क्योंकि उन्हें Research के Goals, Agendas और Reasons केवल Business Goals के रूप में बताए जाते हैं।

App के अंदर Fake प्यास जगाई जाती है और फिर उसे Fake पानी पिलाया जाता है।

पिछले 6 महीनों में आपने भी देखा होगा कि जो चीज़ें पहले केवल Social Media पर दिखाई देती थीं, वही अब हमारे घरों के सामने, सड़कों पर और समाज में वास्तविक रूप से दिखाई देने लगी हैं। लोग केवल देखते हैं, प्रतिक्रिया देते हैं, और फिर अगले Content की ओर बढ़ जाते हैं।

Social Media Matrix Manipulation का बहुत बड़ा Tool है और इसलिए आप देख रहे हैं कि लोगों को किस तरह गुमराह किया जाता है।

इस Matrix के जाल से छूटने का एक ही तरीका है—

अपनी Awareness और Consciousness का विस्तार करना, इस खेल के बारे में जागरूक होना, और यह खेल खेलना बंद कर देना।

जागो!