मूंगफली का सिद्धांत (The Peanut Theory)

23

Jul
By Virat anand
62

मूंगफली का सिद्धांत (The Peanut Theory)

 

हम सभी कभी न कभी मूंगफली खाना पसंद करते हैं। ऐसा बहुत कम होता है कि आप सिर्फ एक मूंगफली खाकर रुक जाएँ। आमतौर पर उसका स्वाद, कुरकुरापन और बाद का स्वाद (aftertaste) हमें अगली मूंगफली उठाने के लिए प्रेरित करता है।

यहीं से यह बात रोचक हो जाती है।

जब आप फ्लो स्टेट में होते हैं, तो हर मूंगफली का आनंद लेते हुए अगली मूंगफली अपने आप उठा लेते हैं। आपको उम्मीद होती है कि हर बार वही अच्छा अनुभव मिलेगा।

लेकिन अचानक एक मूंगफली कड़वी निकल आती है, ठीक से भुनी नहीं होती, या उसका स्वाद खराब होता है। बस, पूरा अनुभव बदल जाता है। आपका ध्यान उस एक खराब स्वाद पर अटक जाता है और कई बार उसके बाद अच्छी मूंगफलियों का भी पहले जैसा आनंद नहीं ले पाते।

यही एक महत्वपूर्ण बात है।

इसी तरह आप देख सकते हैं कि मैट्रिक्स आपके फ्लो स्टेट को कैसे तोड़ने की कोशिश करता है। कुछ समय तक सब कुछ अच्छा चलता है, फिर अचानक कोई ट्रिगर आ जाता है—कोई पुरानी याद, कोई व्यक्ति, या बिना कारण बना हुआ नकारात्मक मूड। उसका उद्देश्य आपको आपके फ्लो स्टेट से बाहर खींचना होता है।

मैट्रिक्स आपके व्यवहार, आपकी कमजोरियों और उन पलों का अध्ययन करता है जब आप पहले असुरक्षित महसूस कर चुके होते हैं। फिर वह एक छोटा-सा नकारात्मक बीज बो देता है, जो बाद में भावनाओं के उतार-चढ़ाव का कारण बन सकता है।

लेकिन याद रखिए, हर परिस्थिति अस्थायी होती है।

यदि आप उसे आने दें, बिना विरोध के केवल उसका अवलोकन करें, और फिर सचेत रूप से एक नया अनुभव चुनें, तो आप अपने फ्लो स्टेट में बने रह सकते हैं।

अधिकतर लोग यहीं गलती करते हैं। वे सोचने लगते हैं—

“मैं तो अभी खुश था, अब ऐसा क्यों हो गया?”

“अच्छी चीज़ें ज़्यादा देर तक क्यों नहीं टिकतीं?”

“मुझे बार-बार दुख क्यों मिलता है?”

“मैं हमेशा पीड़ित ही क्यों बन जाता हूँ?”

यहीं वे अपने फ्लो स्टेट से बाहर आ जाते हैं।

एक सरल नियम समझिए—पेंडुलम (Pendulum) आपकी ऊर्जा से ही मजबूत होता है, कमजोर होता है, या पूरी तरह समाप्त हो सकता है।

इस खेल को समझने का सबसे अच्छा तरीका है सिर्फ साक्षी (Observer) बनना और No Resistance, No Justification का अभ्यास करना।

फिर सचेत रूप से एक नया अनुभव रचिए और अपने फ्लो स्टेट, यानी अपने संतुलित (Balanced) स्वभाव में वापस आ जाइए।

मूंगफली केवल एक स्वादिष्ट नाश्ता है। यदि एक मूंगफली खराब निकल आए, तो इसका मतलब यह नहीं कि पूरी कटोरी खराब है।

आप चाहें तो उस एक कड़वे अनुभव को छोड़कर अगली मूंगफली का आनंद ले सकते हैं। या फिर कोई दूसरा नाश्ता भी चुन सकते हैं।

यही इस सिद्धांत का सार है।

अपने फ्लो स्टेट को पहचानिए। समझिए कि मैट्रिक्स उसे कैसे बाधित करने की कोशिश करता है। फिर हर ट्रिगर को केवल देखिए, बिना विरोध और बिना सफाई दिए। उसके बाद सचेत रूप से एक नया अनुभव चुनिए और अपने स्वाभाविक फ्लो स्टेट में वापस लौट आइए।