YOU CAME HERE FOR THE GREAT SHIFT

14

May
By TGA
75

YOU CAME HERE FOR THE GREAT SHIFT

आप यहाँ इस बड़े बदलाव के लिए आए हो। 

फोटो को देखे.. नीचे हमारी नीली पृथ्वी है, उसमें से एक सुनहरी रोशनी निकल रही है। और पृथ्वी की तरफ आसमान से अनगिनत ज्योतिर्मय आत्माएं आ रही हैं।

यह कोई साइंस-फिक्शन नहीं है, ये रौशनीवाली आत्माएं हम हैं। आप, मैं, और वो सारे लोग जिन्हें पिछले कुछ सालों से लग रहा है कि "कुछ तो बदल रहा है, पर समझ नहीं आ रहा क्या।" क्योंकि हम खुद को भूलकर इस पृथ्वी पर आएँ थे। और अब हम याद करने लगे है- हम असल मे कौन है और यहाँ क्यों आएं थे। 

🌎 यह Great Shift क्या है?

1. यह दुनिया का अंत नहीं, हमारी चेतना (काँशसनेस) का अपग्रेड है। 

पुरानी दुनिया एक ही चीज़ पर चलती थी- डर। 
लोग क्या कहेंगे का डर
पैसे खत्म होने का डर
पीछे रह जाने का डर
सर्वाईव करने का डर
किसी को खो देने का डर
मरने का डर
ऐसे अनगिनत डर..

इस डर से हमने सिस्टम बनाए: पढाई करो, नौकरी करो, चुप रहो, जैसा सब कर रहे हैं वैसा करो। 

अब एक नई फ्रीक्वेंसी आ रही है, और यह दिव्य समय है। 
यह चेतना का बदलाव है। मानवता पहली बार जाग रही है.. 3D से 5D मे शिफ्ट कर रही हैं।

अब लोग पूछ रहे हैं "क्या यही जिंदगी है?" "मुझे अंदर से खाली क्यों लगता है?" "मैं सच में क्या करना चाहता हूँ?" 

यही शिफ्ट है.. ये बाहर सरकार बदलने से नहीं होगी। ये अंदर से होगी, एक-एक इंसान से।

🌎 2. तो आप यहाँ क्यों आए हो?

क्योंकि आपकी आत्मा ने ये टाइम स्लॉट बुक किया था। यह टाईमलाईन आपने चुनी थी। 

मज़ाक नहीं.. जब पृथ्वी इतनी तेज़ी से अपनी वाइब्रेशन बदल रही हो, तब उसे संभालने के लिए ज़मीन पर कुछ लोगों का मौजूद होना ज़रूरी होता है जो रोशनी को पकड़ सकें।
जो सह-निर्माण करे, इस उथलपुथल भरी दुनिया मे वो खुद को याद कर सके की वे कौन है..और कलेक्टीव काँशसनेस मे शिफ्ट लाने के लिए रिपल क्रिएट कर सके। जो पुरानी वास्तविकता से नई वास्तविकता मे जाने के लिए मानवता के लिए पुल बन सके। 

🎯 आपको शायद यह सब महसूस हो रहा होगा, और आप सोचते हो कि आप अकेले पागल हो रहे हो:
भीड़ में होकर भी मन उचट जाना
पुराने दोस्त, पुरानी बातें अब बोझ लगना
अचानक नींद टूटना, 3-4 बजे जाग जाना, 
शरीर में अजीब थकान और टूटन, पर डॉक्टर कहता है सब नॉर्मल है। नौकरी अच्छी है पर मन कहता है "ये मेरा नहीं है"

जागना (स्पिरीचेयुल अवेकनिंग) हमेशा रोशनी-रोशनी नहीं लगता। यह केवल "लव्ह & लाईट" (प्रेम और प्रकाश) कहना नहीं है। कई बार ये बस इतना होता है कि आपको ज़्यादा स्पेस चाहिए। जो चीज़े अब आपके साथ मैच नहीं करतीं, उनसे आप अपने आप पीछे हटने लगते हो। जागने का मतलब है हम जिस वास्तविकता मे जी रहे है.. जो पहचाने हमने अपने उपर ओढी है क्या सच मे वो "मैं" हूँ? यह जानना..जागने का मतलब है अपनी सच्ची पहचान की तरफ बढना.. अवेकनिंग एक झटके मे नहीं होता.. वह वह धीरे-धीरे होता है। बिल्कुल सुबह की तरह। एकदम से सूरज नहीं निकलता.. पहले हल्का उजाला आता है, फिर चिड़िया बोलने लगती हैं, फिर ठंडी हवा थोड़ी गर्म लगने लगती है। आपको पता भी नहीं चलता और रात खत्म हो चुकी होती है। आध्यात्मिक जागरण भी इसी तरह होता है,और जब यह पूरा होता है तो आप वह नही रहते जो पहले थे। 

तो जान लो आप टूट नहीं रहे हो.. आप री-ट्यून हो रहे हो। जैसे पुराना रेडियो नई फ्रीक्वेंसी पकड़ रहा हो।

🌎 3. इस शिफ्ट में आपका रोल क्या है?

आपको दुनिया बचाने नहीं जाना है। आपको बस सच में जीना है।

जब आप:
गुस्से में भी एक पल रुक कर सांस लेते हो
किसी को जज करने की जगह समझने की कोशिश करते हो,
"सब कर रहे हैं" की जगह "मेरा दिल क्या कहता है" यह सुनते हो..
बाहरी दुनिया से कटकर अपने भीतर लौटते हो
पुरानी कंडीशनिंग और मान्यताओं से बाहर आने का साहस रखते हो
तब आप उस नई पृथ्वी के लिए सिग्नल स्ट्रॉन्ग करते हो।

इसे ही लाइटवर्कर, स्टारसीड कहते हैं। भारी शब्दों में मत फंसना। मतलब बस इतना है आप रोशनी लेकर आए हो, और उसे आपको जलाए रखना है।

🌎 4. फिर इतनी तकलीफ क्यों हो रही है?

क्योंकि हम बीच में हैं। अभी हम पूरी तरह नई वास्तविकता मे नहीं आए और पुरानी वास्तविकता छोडी भी नहीं है। एक पैर पुरानी दुनिया में है, जहाँ बिल भरने हैं, EMI है, रिश्ते निभाने हैं। और दूसरा पैर नई दुनिया में है, जहाँ आत्मा आज़ादी मांग रही है। रात ढलने के बाद पौ फूटने से पहले जो स्थिति होती है ठीक वैसीही वास्तविकता मे हम है। 

इस बीच सबकुछ तेजी से बदल रहा होता है और इस खिंचाव से एंग्जायटी होती है। पुराना टूटता है तो असहज लगता है, दुख होता है।

इस समय सबसे ज़रूरी है अपने नर्वस सिस्टम को शांत रखना। सोशल मिडीयापर इंफॉर्मेशन वॉर चल रहा है.. ज्यादा ज्ञान इकट्ठा करने से बचे.. अपने शरीर को सुने, डर फैलानी वाली खबरों पर ध्यान न देकर अपनी ऊर्जा बचाएँ। 
सुबह 5 मिनट धूप में बैठे
जमीन पर नंगे पैर चले
पानी ज्यादा पिए
मन जो कहता है उसे लिखे, 
रोना आए तो रो लो
जब भी जो भावनाएँ उठे उन्हे बहने दे
हर चीज़ पर रिएक्ट ना करे। 

🌎 हर रोज खुद को याद दिलाना: 
रोज़ सुबह आईने में खुद से कहो "मैने असेंन्शन चुना हैं, मैं यहाँ गलती से नहीं हूँ। मैं इस बदलाव के लिए आया हूँ।" यह अफर्मेशन नहीं, रिमाइंडर है।

फोटो में जो हजारों आत्माएं पृथ्वी की ओर आ रही हैं, वह कहानी नहीं है। वह आपकी ही आत्मा की याद है। आपने यहाँ आने से पहले वादा किया था कि जब दुनिया सबसे ज़्यादा हिलेगी, तब मैं डरूँगा नहीं, मैं रोशनी बनूँगा।

अब वो समय आ गया है।✨

इसलिए अगली बार जब सब कुछ बहुत ज़्यादा लगे, तो डरना मत। रुकना, सांस लेना, और मुस्कुराना। क्योंकि आप बिल्कुल सही जगह पर हो।

आप सच में, इस Great Shift के लिए ही आए हो। 💫